Saturday, 26 December 2015

श्री राजेंद्र चोपडा जी को श्रध्धांजलि

नाम : श्री राजेंद्र मफतलाल चोपड़ा 
जन्म तारीख : २७/२/१९६८,      स्वर्ग वास : २२/१२/२०१५
वतनी : शाहीबाग , अहमदाबाद 
मूल वतनी : राजस्थानी 
              श्री राजेंद्र भाई चोपड़ा एक ऐसे व्यक्ति जिसके सिर्फ खड़े रहेने से दुसरोमे लोगो की सेवा करनेका जोश भर जाए , वेहे राजीव दीक्षित स्वदेशी संस्था (अहमदाबाद ) के संपर्क में ९ मार्च २०१३ को आये , और ऐसे आंधी की तरह आये की अहमदाबाद की निष्क्रिय संस्था में जान फूंकी , उनके २.५ साल के समय अंतराल में उन्होंने राजीव दीक्षित के विचारोको लोगो तक पहोचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी , उनका एकही मकसद था की आयुर्वेद के माध्यम से भारत के हर व्यक्ति को स्वस्थ करना , उसके लिए हमेशा तत्पर रहेते थे , उन्हिकी बदोलत अहमदाबाद में हम लोगोको शुध्ध घानी का मूंगफली का तेल ,सेंधा नमक, देशी गुड, और गाय का देशी घी पहोचाने में सफल हो पाए, उनके नेतृत्वमे सच्चाई माता भक्त मंडल द्वारा २५/२६/२७ सितम्बर २०१५ को अहमदाबाद में भव्य चिकित्सा शिबिर का आयोजन किया गया जो बहोत हि सफल रहा , राजेंद्र भाई के साथ में रहने मात्र से हमें एक अनोखी उर्जा मिलती थी और हम लगातार काम करते थे , वो एक बात हमें बार बार कहेते थे की 'ये कल युग है हम चाहे जितना भी भला करे कुछ होने वाला नहीं है मगर फिर भी हमें सेवा में लगे रहेना है ,कल युग में जो सेवा करेगा वही मुसीबतों का सामना भी करेगा , मगर हम डटे रहेंगे ,हमें सिर्फ राजीव भाई के विचारोको घर घर तक पहोचाना है बाकि ऊपर वालेकी मर्जी .....' राजेंद्र भाई ने मेरा मन स्वदेशी (संवाद )समूह को बाखूबी संचालित किया और देश के कोने कोने तक लोगो को मुफ्त चिकित्सा दी जाये उसका प्रयास किया .
                १०/१२/२०१५ को अहमदाबाद के बगोदर हाइवे पे उनका अकस्मात हुआ और वेहे और उनकी पत्नी श्री को काफी चोट आई , राजेन्द्र भाई को सिम्स हॉस्पिटल में आई सी यु में रखा गया और २२/१२/२०१५ को वेहे हम सब को छोड़ के परमात्मा के पास चले गए , उनकी इस अचानक हुई विदाय को हमारा दिल आज भी सच नहीं मान रहा , हमेशा ऐसा लगता है की अभी उनका फोन आयेगा और राजीव दीक्षित के कोई कार्यक्रम की योजना के लिए बात करेंगे .....उनकी ये विदाइ से अहमदाबाद की पूरी टीम सदमे में आ गयी है ,उन्होंने आखरीमे महेसाणा की शिबिर की पूरी योजना तैयार की थी जो ११/१२/१३ जनवरी २०१६ को होने वाली है , वेहे उसके लिए बहोत उत्साही थे ...हमें ऐसा लगता है की हमने अहमदाबाद के राजीव दीक्षित को खो दिया है ......
राजेंद्र भाई की पवित्र आत्मा हमेशा हमारा मनोबल बढाती रहे एसी हमारी प्रभु से प्रार्थना है ...वंदेमातरम  

Wednesday, 9 December 2015


राजीव दीक्षित जी की पांचवी पुण्य तिथिपर
हमने १८ रोगों के इलाज को एक पेम्फलेट में बनाके १००००० नंग बनाकर अहमदाबाद में कार्यकर्ता द्वारा वितरण करवाया गया , जिसमे निम्न बीमारियो का इलाज आयुर्वेद के अनुसार लिखा है और सम्पूर्ण भारत में जहाभी स्वदेशी चिकित्सा शिबिर लगती है वहा भी लोकल स्वदेशी संस्था द्वारा ये पेम्फलेट वितरण होता है ,
हमारा उदेश्य " रोगी स्वयं का सबसे अच्छा डॉक्टर बन सकता है "
१) सिरदर्द
२) गुर्दे की पथरी /पिताशय की पथरी
३) मोटापा
४) बवासीर /बगंदर
५) मासिक समशया / अति और अल्प रक्त स्त्राव
६) स्वेत/रक्त प्रदर
७) मधुमेह
८) अम्लपित
९) आँखों के रोग
१०) कब्ज
११) उच्च/ निम्न थाईराइड
१२) ह्रदय रोग
१३) निम्न रक्त चाप
१४) उच्च रक्त चाप
१५) घुटनों का दर्द /जोड़ो का दर्द
१६) दमा
१७) रक्त अल्पता
१८) पीलिया
सो आप अपने शहर में अपने परिवार में व समाज के लिए ये पेम्फलेट १००००-२०००० बनाकर वितरण जरुर कराये , सो आप अपना इ मेइल आईडी जरुर यहाँ कोमेंट में लिखे जिस से हम आपको मेइल कर सके , और आप स्वदेशी चिकित्सा के माध्यम से भार्तियोका स्वास्थ अच्छा करके स्वदेशी अपनानेकी राह पर ले जाकर राजीव दीक्षित जी का अधूरा सपना हम पूरा करनेकी कोशिश कर सके | ये हम सब लोगो द्वारा पांचवी पुण्य तिथि की सच्ची श्रध्धांजलि होगी .
वन्देमातरम
राजीव दीक्षित स्वदेशी संस्था अहमदाबाद

Tuesday, 8 December 2015

૨૦૧૬ માં થનાર કાર્યકાર્મો ની માહિતી

વન્દેમાતરમ ,  
   અમદાવાદ ના બધાજ રાજીવ દીક્ષિત સમર્થક ભાઈ બહેનો અને કાર્યકર્તા મિત્રોને નિવેદન છે કે જાન્યુઆરી મહિના માં થનાર કાર્યક્રમો માટે પોતાની કમર કસી લે , ૯/૧૦/૧૧- જાન્યુઆરી-૨૦૧૬ આઈ આઈ એમ અમદાવાદ માં(સાત્વિક ફૂડ ફેસ્ટીવલ માં ) સ્ટોલ અને મહેસાણા માં ૧૧/૧૨/૧૩- જાન્યુઆરી -૨૦૧૬ ની આસ પાસ સ્વસ્થ શીબીર નું આયોજન થઇ રહ્યું છે તો દરેક ભાઈ બહેનોને વિનંતી છે કે જે મિત્રો સ્વૈચ્છિક સેવા આપવા માંગતા હોય તેઓ પોતાનું નામ ૯૭૧૪૦૨૫૧૪૬ પર નોંધાવી દે , દરેક મિત્રોને નિવેદન છે કે પોતાનો યોગ્ય સહયોગ આપી આ બંને કાર્યક્રમોને સફળ બનાવવામાં મદદ રૂપ થાય .
                                                                                                     રાજીવ દીક્ષિત સ્વદેશી સંસ્થા અમદાવાદ

Saturday, 21 November 2015

अलसी का सेवन आपको बीमारियो से दूर रख सकता है

अलसी का सेवन आपको बीमारियो से दूर रख सकता है


सुरेश भट्ट : सुपर फुड अलसी में ओमेगा थ्री व सबसे अधिक फाइबर होता है। यह डब्लयू एच ओ ने इसे सुपर फुड माना है। यह रोगों के उपचार में लाभप्रद है। लेकिन इसका सेवन अलग-अलग बीमारी में अलग-अलग तरह से किया जाता है।
स्वस्थ व्यक्ति को रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच अलसी का पाउडर पानी के साथ ,सब्जी, दाल या सलाद मंे मिलाकर लेना चाहिए । अलसी के पाउडर को ज्यूस, दूध या दही में मिलाकर भी लिया जा सकता है। इसकी मात्रा 30 से 60 ग्राम प्रतिदिन तक ली जा सकती है। 100-500 ग्राम अलसी को मिक्सर में दरदरा पीस कर किसी एयर टाइट डिब्बे में भर कर रख लें। अलसी को अधिक मात्रा मंे पीस कर न रखें, यह पाउडर के रूप में खराब होने लगती है। सात दिन से ज्यादा पुराना पीसा हुआ पाउडर प्रयोग न करें। इसको एक साथ पीसने से तिलहन होने के कारण खराब हो जाता है।
खाँसी होेने पर अलसी की चाय पीएं। पानी को  उबालकर उसमें अलसी पाउडर मिलाकर चाय तैयार करें।एक चम्मच अलसी पावडर को दो कप (360 मिलीलीटर) पानी में तब तक धीमी आँच पर पकाएँ जब तक यह पानी एक कप न रह जाए। थोड़ा ठंडा होने पर शहद, गुड़ या शकर मिलाकर पीएँ। सर्दी, खाँसी, जुकाम, दमा आदि में यह चाय दिन में दो-तीन बार सेवन की जा सकती है। दमा रोगी एक चम्मच अलसी का पाउडर केा आधा गिलास पानी में 12 घंटे तक भिगो दे और उसका सुबह-शाम छानकर सेवन करे तो काफी लाभ होता है। गिलास काँच या चाँदी को होना चाहिए।
समान मात्रा में अलसी पाउडर, शहद, खोपराचूरा, मिल्क पाउडर व सूखे मेवे मिलाकर नील मधु तैयार करें।  कमजोरी में व बच्चों के स्वास्थ्य के लिए नील मधु उपयोगी है।
डायबीटिज के मरीज को आटा गुन्धते वक्त प्रति व्यक्ति 25 ग्राम अलसी काॅफी ग्राईन्डर में ताजा पीसकर आटे में मिलाकर इसका सेवन करना चाहिए। अलसी मिलाकर रोटियाँ बनाकर खाई जा सकती हैं। अलसी एक जीरो-कार फूड है अर्थात् इसमें कार्बोहाइट्रेट अधिक होता है।शक्कर की मात्रा न्यूनतम है।
कैंसर रोगियों को ठंडी विधि से निकला तीन चम्मच तेल, छः चम्मच पनीर में मिलाकर उसमें सूखे मेवे मिलाकर देने चाहिए। कैंसर की स्थिति मेें डाॅक्टर बुजविड के आहार-विहार की पालना श्रद्धा भाव से व पूर्णता से करनी  चाहिए। कैंसर रोगियों को ठंडी विधि से  निकले तेल की मालिश भी करनी चाहिए।
साफ बीनी हुई और पोंछी हुई अलसी  को धीमी आंच पर तिल की तरह भून लें।मुखवास की तरह इसका सेवन करें। इसमें संेधा नमक भी मिलाया जा सकता है। ज्यादा पुरानी भुनी हुई अलसी प्रयोग में न लें।
बेसन में 25 प्रतिशत मिलाकर अलसी मिलाकर व्यंजन बनाएं। बाटी बनाते वक्त भी उसमें भी अलसी पाउडर मिलाया जा सकता है। सब्जी की ग्रेवी में भी अलसी पाउडर का प्रयोग करें।
अलसी सेवन के दौरान खूब पानी पीना चाहिए। इसमें अधिक फाइबर होता है, जो खूब पानी माँगता है।

Bournvita,Horlicks, Complan,Boost जैसे हेल्थ हेल्थ टॉनिक के नाम पर धोखा

Bournvita,Horlicks, Complan,Boost जैसे हेल्थ हेल्थ टॉनिक के नाम पर धोखा


By Suresh Bhatt  :अगर आप भी अपने बच्चों को Bournvita,Horlicks, Complan,Boost जैसे हेल्थ टोनिक पिला रहे हैं तो कृपया एक बार इसे अवश्य पढ़ें lअखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की एक रिपोर्ट के अनुसार जब Bournvita का प्रयोगशाला में परिक्षण किया गया तो पोषक तत्वों की मात्रा गुड-मूंगफली की पट्टी से भी कम पायी गयी तथा इसकी निर्माण सामग्री का आधार मूंगफली की खल को बताया गया l खल वह बचा कुचा कचरा है जो मूंगफली का तेल निकलने के बाद बचता है जिसे गांवों में जानवरों को खिलाया जाता है l
यदि आप दूध के साथ गुड-मूंगफली की एक पट्टी (गच्च्क) खाते हैं तो आपको उसमे इतना प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व मिलते हैं जितने 1 किलो Bournvita के डब्बे में नहीं मिल सकते और इस कचरे को यह विदेशी कंपनिया प्रचार के माध्यम से 250-300 प्रति किलो बेच रही हैं, जिनमें पोषक तत्वों की मात्रा नाम मात्र भी नहीं है l ऐसा ही एक दूसरा उत्पाद है Horlicks यह कोई आसमान उतरा नया उत्पाद नहीं बल्कि ज़ों और चने का सत्तू ही है जिसे अंग्रेजी नाम के साथ बेचा जा रहा है और पढ़े लिखे मूर्ख लोग 35 रुपये किलो में उपलब्ध ज़ों-चने का सत्तू नहीं खरीदते बल्कि 200-250 अंग्रेजी नाम से बिक रहा सत्तू खरीद लाते हैं सिर्फ इसलिए क्योंकि सत्तू का प्रचार नहीं होता l यह जितने भी हेल्थ टोनिक भारत में बिक रहे हैं, इन सबमें 1 केले के बराबर पोषक तत्व नहीं होते यह इस देश का दुर्भाग्य है की हर साल भारत में 2000 करोड़ रुपये के हेल्थ टोनिक बिक जाते हैं जिनमे 2 पैसे के भी पोषक तत्व नहीं होते हैं l

सूर्य नमस्कार से सम्पूर्ण शरीर को आरोग्य, शक्ति एवं ऊर्जा की प्राप्ति होती है .

सूर्य नमस्कार से सम्पूर्ण शरीर को आरोग्य, शक्ति एवं ऊर्जा की प्राप्ति होती है .

surya namaskar
सूर्य नमस्कार से सम्पूर्ण शरीर को आरोग्य, शक्ति एवं ऊर्जा की प्राप्ति होती है, इससे शरीर के सभी अंग-प्रत्यंगों में क्रियाशीलता आती है तथा समस्त आंतरिक ग्रंथियों के अन्तःस्राव (हार्मोन्स) की प्रक्रिया का नियमन होता है, यदि संभव हो तो सूर्योदय के समय करें, इसको 11 से 21 बार अपनी शक्ति के अनुसार प्रतिदिन कर सकते हैं

क्या आप हडि्डयों में खोखलापन होने कि बीमारी से परिचित हैं

क्या आप हडि्डयों में खोखलापन होने कि बीमारी से परिचित हैं


boneकुमार गिरीश : वैसे तो हडि्डयों में खोखलेपन का रोग किसी भी उम्र के स्त्री-पुरुष को हो सकता है लेकिन यह फिर भी ज्यादातर यह रोग 50 वर्ष के उम्र से ज्यादा वर्ष के लोगों में पाया जाता है। यह रोग उन स्त्रियों को भी अधिक होता है जो स्त्रियां रजोनिवृति (मासिकधर्म का आना बंद हो जाना) की अवस्था में होती है।
हडि्डयों में खोखलापन होने के लक्षण-
हडि्डयों में खोखलेपन के रोग से पीड़ित रोगी के पैरों तथा कमर में दर्द होने लगता है।रोगी व्यक्ति की कमर झुक जाती है और उसे चलने-फिरने में परेशानी होने लगती है।रोगी के कूल्हे की हड्डी कमजोर हो जाती है।रोगी की मुड़ने या घूमने की शक्ति कम हो जाती है और कमर की मांसपेशियों में ऐंठन सी होने लगती है।इस रोग से पीड़ित रोगी की हड्डी जरा सा ही झटके लगने से टूट जाती है।
हडि्डयों का खोखलापन होने का कारण-
जो व्यक्ति असंतुलित भोजन का सेवन करता है उसकी हडि्डयों में खोखलापन होना शुरू हो जाता है।शरीर में कैल्शियम एवं विटामिन `डी´ की कमी हो जाने के कारण भी हडि्डयां खोखली हो जाती हैं।40 उम्र से ऊपर की स्त्रियों का जब मासिकस्राव बंद हो जाता है तो उनकी हडि्डयां खोखली हो जाती हैं।
हड्डियों का खोखला हो जाने का सबसे मुख्य कारण तेल ही है, जो की आजकल बिना चिकनाई का इस्तेमाल करते हैं, उन्हे यह रोग अवश्य होता है! इसलिए बिना चिकनाई का तेल, कैमिकल युक्त रिफाईनड बिल्कुल नहीं खाना चाहिए, इसकी जगह भारतीय परम्परा के द्वारा निकाला गया तेल (घाणी) का ही खाना चाहिए!
हडि्डयों में खोखलापन हो जाने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार-
इस रोग से पीड़ित रोगी को 1 सप्ताह तक फलों तथा सब्जियों का रस पीना चाहिए तथा भोजन में अधिक से अधिक फलों का सेवन करना चाहिए।रोगी व्यक्ति को संतुलित आहार (भोजन) का सेवन करना चाहिए! पांम आंयल और, सभी तरह के रिफाईनड तेल बन्द कर देना चाहिए ।रिफाईनड की जगह सिर्फ कच्ची घाणी का तेल ही इस्तेमाल करना चाहिए!  तिल का तेल या फिर सफेद तिलों का दूध रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन पिलाने से कुछ ही दिनों में हडि्डयों में खोखलेपन का रोग ठीक हो जाता है।हडि्डयों में खोखलेपन से पीड़ित रोगी यदि प्रतिदिन काष्ठज फल का सेवन करता है तो उसका यह रोग ठीक हो जाता है।इस रोग से पीड़ित रोगी को तला-भुना, दूषित भोजन, चीनी, मिठाई तथा मैदा आदि नहीं खाने चाहिए।इस रोग से पीड़ित रोगी को सबसे पहले अपने पेट को साफ करने के लिए एनिमा क्रिया करनी चाहिए तथा नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए। इससे कुछ ही दिनों में हडि्डयों में खोखलेपन का रोग ठीक हो जाता है।